आप को किस क्षेत्र मे मिलेगी सफलता - ज्योतिषाचार्य डॉ उमाशंकर मिश्र 94150 877 11 astroexpertsolutions.com कुण्डली का दशम भाव कर्म भाव कहा जाता है। इसके स्वामी को दशमेश या कर्मेश कहा गया है। दशम भाव से व्यक्ति की आजीविका का विचार किया जाता है। अर्थात् व्यक्ति सरकारी नौकरी करेगा अथवा प्राइवेट, या व्यापार करेगा तो कौन सा, उसे किस क्षेत्र में अधिक सफलता मिलेगी। आज अधिकांश लोग अपनी आजीविका से संतुष्ट नहीं हैं, उनका कार्य क्षेत्र या कर्म का प्रकार उनके मन के अनुकूल नहीं है। अब प्रश्न उठता है कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मनोनुकूल कार्य कौन सा हो सकता है, उसका निर्धारण कैसे हो? मन का स्वामी चंद्र जिस राशि में हो उस राशि से स्वामी ग्रह की प्रकृति के आधार पर या चंद्र से उसके युति अथवा दृष्टि संबंध के आधार पर यदि कोई व्यक्ति अपनी आजीविका (व्यापार नौकरी) का चयन करता है अथवा कार्यरत है तो वह कैरियर उसके मन पसंद का होगा। जन्मकुंडली में कोई ग्रह जब लग्नेश, पंचमेश या नवमेश होकर दशम भाव में स्थित हो, या दशमेश होकर किसी भी त्रिकोण (1, 5, 9 भावों) में, या अपने ही स्थान में स्थित हो तो व्यक्ति की आजीविका के पर्याप्त साधन होते हैं। वह व्यवसाय या नौकरी में अच्छी प्रगति करता है। दशमेश या दशम भावस्थ ग्रह का बल और शुभता दोनों उसके शुभफलों में द्विगुणित वृद्धि करते हैं। भाव 3, 6, 8, 11 या 12 का स्वामी अशुभ भावेश होने पर पापी हो जाता है। जिस जातक की जन्मकुंडली में अशुभ (पापी) ग्रह दशम भाव में हों, तो उसकी आजीविका का सत्यानाश कर देते हैं। दशमेश का उनसे युति या दृष्टि संबंध भी खतरनाक होता है। ऐसे जातक व्यापार में असफल होते हैं तथा उन्हें कोई सरकारी नौकरी भी नहीं मिलती है। दशमेश यदि नीच, शत्रुगृही या अस्त होकर त्रिक भाव (6, 8, 12) में हो या त्रिषडाय (भाव 3, 6, 11 का स्वामी) यदि दशम में स्थित हो तो व्यक्ति को आजीविका का कोई साधन नहीं मिलता है और अपने पिता की पद प्रतिष्ठा को धूमिल करता है। यदि लग्नेश और दशमेश एक साथ हों तो जातक नौकरी में विशेष प्रगति करता है। दशमेश केंद्र या त्रिकोण में हो तो जातक शासकीय अधिकारी होता है, किंतु इस हेतु दशमेश का उच्च राशिस्थ होना आवश्यक है और उसे अस्त नहीं होना चाहिए। गुरु दशमेश होकर यदि त्रिकोण (1, 5, 9) में हो तो जातक निश्चय ही उच्चपद प्रतिष्ठित होकर सांसारिक सुखों का भोक्ता और यशस्वी होता है। लग्न से दशम भाव में सूर्य हो तो पिता से धन मिलता है। चंद्र हो तो माता से, मंगल हो तो शत्रु से, बुध हो तो मित्र से, गुरु हो तो भाई से, शुक्र हो तो स्त्री से और यदि राहु या केतु हो तो जातक छल प्रपंच केद्वारा धन प्राप्त करता है। दशम भावस्थ राशि विवेक - दशम भाव में जो राशि हो या दशमेश जिस राशि का हो। उस राशि के स्वामी के अनुसार भी दैवज्ञ को मोटे तौर पर आजीविका का विवेचन करना चाहिए। मेषः यदि दशम भाव में मेष राशि हो तो जातक को जीवन निर्वाह हेतु एक से अधिक कार्य करने पड़ते हैं। इसमें कृषि संबंधित कार्य से लेकर एजेंसी आदि कार्य शामिल हैं। मेष राशि का चंद्र ऑटोमोबाइल उद्योग में प्रवेश करता है। मेष राशि में मंगल या बुध मेकैनिकल इन्जीनियर बनाता है। वृषः वाहन, पशु-पक्षी या वनों और कृषि से संबंधित कार्य करने वाला ऐसा जातक एकाउंटिंग का कार्य करने वाला होता है। मिथुन: दशमेश हो तो व्यक्ति प्रोफेसर या लेक्चरर बनकर धन अर्जित करता है। बुध बैंकर भी बनाता है। विज्ञापन से संबंधित व्यवसाय करता है। कर्कः चांदी के आभूषणों का व्यवसायी होता है और रसायन शास्त्र, जीवविज्ञान व धार्मिक कार्यों में उसकी रुचि होती है। सिंहः दशम भाव में सिंह राशि वाले जातक को जीविका हेतु कठोर परिश्रम करना पड़ता है। ऐसा व्यक्ति रत्न, सोने, पीतल, कांसे या कृषि उत्पाद का व्यवसाय करता है। कन्याः दशम भावस्थ कन्या राशि वाला जातक वास्तुशिल्पी, ट्रांसपोर्टर लेखक या चित्रकार होता है। किंतु अपने कत्र्तव्य के प्रति उदासीन रहता है, नौकरी गंभीरता से नहीं करता। तुलाः व्यापार में तीव्रता से उन्नति की ओर अग्रसर होता है। वित्तीय सलाहकार, दुकानदारी आदि में भी सफल रहता है। तुला राशि का दशमस्थ बुध और राहु जातक को वैज्ञानिक बनाता है। वहीं शनि कानूनी पेशे से जोड़ता है। वृश्चिकः नौकरी में जातक कठोर परिश्रम के उपरांत प्रगति करता है। ऐसा जातक जलसेवा, जलविद्युत, खेतीबाड़ी से जीवन यापन करता है। धनुः दशम स्थान में धनु राशि होने से जातक सचिव, क्लर्क या कोटपाल के पद पर कार्य कर सकता है। उसे नौकरी में परेशानी एवं विरोधी वातावरण का सामना करना पड़ता है। मकरः जिस जातक के जन्मांग के दशम भाव में मकर राशि होती है, वह समय के अनुकूल सेवाकार्य करने में समर्थ होता है। कुंभः ट्रांसपोर्टर, पल्लेदार आदि कार्यों से धनार्जान करता है। राजनीति में प्रवीण, विरोधियों को अपने वश में रखने वाला और उनसे इच्छानुसार कार्य कराने वाला होता है। मीनः दशम भावस्थ मीन राशि का जातक अपने नीतियुक्त कार्यों से नौकरी में विशेष प्रगति करता है। पेट्रोल, पानी आदि के कार्यों में सफल और रसायन, जीवविज्ञान आदि विषयों में उसकी विशेष रुचि होती है। सारावली के अनुसार लग्न या चंद्र में जो बलवान हो उससे दशम राशि, दशम भाव में स्थित ग्रह तथा दृष्टियोग के अनुसार मनुष्य की आजीविका का विचार किया जाता है। दशमेश के बली होने से जीविका की वृद्धि और निर्बल होने पर हानि होती है। लग्न से द्वितीय और एकादश भाव में बली एवं शुभ ग्रह हो तो जातक व्यापार से अधिक धन कमाता है। धनेश और लाभेश का परस्पर संबंध धनयोग का निर्माण करता है। दशम भाव का कारक यदि उसी भाव में स्थित हो अथवा दशम भाव को देख रहा हो तो जातक को आजीविका का कोई न कोई साधन अवश्य मिल जाता है। सूर्य, बुध, गुरु और शनि दशम भाव के कारक ग्रह हैं। दशम भाव में केवल शुभ ग्रह हों तो अमल कीर्ति नामक योग होता है, किंतु उसके अशुभ भावेश न होने तथा अपनी नीच राशि में न होने की स्थिति में ही इस योग का फल मिलेगा। बलवान चंद्र से दशम भाव में गुरु हो तो गजकेसरी नामक योग होता है, किंतु गुरु कर्क या धनु राशि का होना चाहिए। ऐसा जातक यशस्वी, परोपकारी धर्मात्मा, मेधावी, गुणवान और राजपूज्य होता है। यदि जन्म लग्न, सूर्य और दशम भाव बलवान हो तथा पाप प्रभाव में न हो तो जातक शाही कार्यों से धन कमाता है और यशस्वी होता है। दशम भावस्थ नवग्रह फल - सूर्यः दसवें भाव में स्थित वृश्चिक राशि का सूर्य चिकित्सा अधिकारी बनाता है। मेष, कर्क, सिंह या धनु राशि का सूर्य सेना, पुलिस या आवकारी अधिकारी बनाता है। चंद्रः शुभ प्रभाव में बली चंद्र यदि दशमस्थ हो तो धनी कुल की स्त्रियों से लाभ होता है। यदि ऐसा व्यक्ति दैनिक उपयोग में आनेवाली वस्तुओं का व्यापार करे तो लाभप्रद होता है। चंद्र से मंगल या शनि की युति विफलता का सूचक है। मंगलः मेष, सिंह, वृश्चिक या धनु राशि का मंगल जातक/जातका को प्राइवेट चिकित्सक और सर्जन बनाता है। ऐसे डाक्टरों को मान-सम्मान और धन की प्राप्ति होती है। मंगल का सूर्य से संबंध हो तो व्यक्ति सुनार या लोहार का काम करता है। बुधः लग्नेश, द्वितीयेश, पंचमेश, नवमेश या दशमेश होकर कन्या या सिंह राशि का बुध गुरु से दृष्ट या युत हो तो व्यक्ति प्रोफेसर या लेक्चरर बनकर धन अर्जित करता है। बुध बैंकर भी बनाता है। बुध शुक्र के साथ या शुक्र की राशि में हो तो जातक फिल्म या विज्ञापन से संबंधित व्यवसाय करता है। गुरुः गुरु का संबंध जब नवमेश से हो तो व्यक्ति धार्मिक कार्यों द्वारा धन अर्जित करता है। गुरु मंगल के प्रभाव में हो तो जातक फौजदारी वकील बनता है। बलवान और राजयोगकारक हो तो जातक न्यायाधीश बना देता है। शुक्रः जातक सौंदर्य प्रसाधन सामग्री, फैंसी वस्तुओं आदि का निर्माता/विक्रेता होता है। शुक्र का संबंध द्वितीयेश, पंचमेश या बुध से हो तो गायन-वादन के क्षेत्र में सफलता मिलती है। शनिः शनि का संबंध यदि भाव या चतुर्थेश से हो तो जातक लोहे, कोयले मिट्टी के तेल आदि के व्यापार से धन कमाता है। बलवान शनि का मंगल से संबंध हो तो जातक इलेक्ट्रीक/ इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर होता है। यदि बुध से संबंध हो तो मेकैनिकल इंजीनियर होता है। शनि का राहु से संबंध हो तो व्यक्ति चप्पल, जूते, रेक्सिन बैग, टायर-ट्यूब आदि के व्यापार में सफल होता है। राहुः दशम भाव में मिथुन राशि का राहु राजनीति के क्षेत्र में सफलता दिलाता है। ऐसा जातक सेना, पुलिस, रेलवे में या राजनेता के घर नौकरी करता है। केतुः धनु या मीन राशि का दशमस्थ केतु व्यापार में सफलता, वैभव, धन और यश का सूचक है। ऊपर वर्णित बिंदुओं के आधार पर अपने अनुकूल आजीविका का निर्णय करें। शुभ/ योगकारक ग्रहों की महादशा में उनसे या जिन ग्रहों से उनका संबंध हो उनसे संबंधित व्यवसाय करने पर अच्छा लाभ होता है। आजीविका हेतु अनिष्ट ग्रहों की शांति के लिए मंत्र, यंत्र, रत्न, दान और पूजा अर्चना आदि समय-समय पर करते रहना चाहिए। Jyotish Acharya Dr Umashankar Mishra सिद्धि विनायक ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र विभव खंड 2 गोमती नगर एवं वेदराज कांप्लेक्स पुराना आरटीओ चौराहा लाटूश रोड लखनऊ 94150 8 7711 9235 7 22996 astroexpertsolutions.com