25 मार्च कल दिनबुधवार से प्रारंभ होगा नया संवत्सर और चैत्र नवरात्रि, इस मुहूर्त में करें घटस्थापना जय श्री काशी विश्वनाथ🙏Jyotish Acharya Dr Umashankar Mishra 🙏 94150 87711 🙏 ✍🏻 चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को नूतन वर्ष अर्थात नव संवत्सर प्रारम्भ होता है। ज्योतिर्विद डॉ उमाशंकर मिश्र के अनुसार 'प्रमादी' नामक नव संवत्सर आरम्भ हो रहा है। इसी दिन से नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, वहीं महाराष्ट्र में गुडी पडवा भी इसी दिन मनाया जाता है। साल के दो गुप्त और दो नवरात्रि में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है। कोई भी काम शुरू करने के लिहाज से नवरात्रि बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। नवरात्रि में नौ दिन माता की पूजा अर्चना की जाती है।  वैसे तो पूरे दिन किसी भी समय घटस्थापना कर सकते हैं प्रातः 6:00 बजे सूर्योदय के वक्त से सायं 3:00 बजे तक अति सर्वोत्तम कलश स्थापना के लिए माता भगवती दुर्गा जी के आवाहन के लिए अति उत्तम मुहूर्त है  सूर्य सिद्धान्त पर आधारित गणना के आधार पर उदया तिथि को ही नव संवत्सर की शुरुआत मानी जाती है इसी कारण 25 मार्च 2020 दिन बुधवार को भारतीय संस्कृति का सर्वमान्य नववर्ष अर्थात् नव संवत्सर 2077 की शुरुआत होगी | यह प्रभवादि षष्टि संवत्सर चक्र का 47वाँ  संवत्सर है। ✍🏻ज्योतिर्विद डा.उमाशंकर मिश्र ने बताया कि शास्त्र सम्मत ऐसी मान्यता है कि सृष्टि रचयिता परम पिता ब्रह्मा जी ने चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को ही सृष्टि की रचना की थी। अतः इसी को आधार मानकर काल गणना का सिद्धान्त चलता है | चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को जो दिन या वार पड़ता है वही उस संवत्सर का राजा होता है और सूर्य की मेष संक्रांति जिस दिन होती है उस दिन से संवत्सर के मंत्री पद का निर्धारण होता है। इस नव संवत्सर में राजा का पद बुध को एवं मंत्री का पद चंद्र को प्राप्त हो रहा है। यह संवत्सर साधारण एवं शुभ फलप्रदायक होगा। जनता एवं समाज में सौम्यता, स्थिरता बनी रहेगी, राजनीतिक दलों सहित समस्त संस्थाओं द्वारा किया गया कार्य-योजना जनता के हित में होगा | प्रमादी नामक इस संवत्सर के राजा बुध है, अतः आम जन मानस के सहयोगी संवत्सर के रूप इस संवत्सर की गणना की जाएगी। शासन तंत्र अपना कार्य कर पाने में सफल होगा और  धार्मिक क्रिया कलापों में सामान्य वृद्धि होगी..!