चैत्र नवरात्रे (25 मार्च प्रतिपदा से 02 अप्रैल रामनवमी तक): मार्कण्डेय पुराण के अनुसार चैत्र नवरात्रि के पहले दिन ही माँ दुर्गा का जन्म हुआ था और उनके कहने पर ही भगवान ब्रम्हा ने संसार की रचना की थी। यहीं कारण है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानि चैत्र नवरात्रि के पहले दिन हिंदू नववर्ष भी मनाया जाता है। इसके अलावा पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान श्रीराम का जन्म भी चैत्र नवरात्रि में ही हुआ था। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन घरों में कलश स्थापना की जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि कलश को सुख-समृद्धि, वैभव, मंगल कार्यों का प्रतीक माना गया है। कलश स्थापना से पूर्व लोग नहा-धोकर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं ततपश्चात माँ दुर्गा की आराधना करते हुए नवरात्रि कलश की स्थापना करते हैं और दीप तथा धूप जलाकर माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं। इसी तरह चैत्र नवरात्रि के अवसर पर कई भक्तों द्वारा अपने घरों में देशी घी की अखंड ज्योति भी जलाई जाती है। इसके साथ ही लोगों द्वारा चैत्र नवरात्रि पूजन के दौरान एक जो दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कार्य किया जाता है। वह है जौ (ज्वार) बोना इसके लिए लोगो द्वारा कलश स्थापना के साथ ही उसके चारों ओर थोड़ी मिट्टी भी फैलाई जाती है और इस मिट्टी के अंदर जौ बोया जाता है। ऐसा करने के पीछे एक काफी रोचक कहना है और हममें से ज्यादेतर लोगो को इसके पीछे का कारण नही पता होता है। ऐसी मान्यता है कि जब सृष्टि की शुरुआत हुई थी। तो जो फसल सबसे पहले उत्पन्न हुई थी, वह जौ ही थी। यहीं कारण है कि पूजा पाठ के हर महत्वपूर्ण कार्य में जौ का ही उपयोग किया जाता है। इसके अलावा वसंत ऋतु में पैदा होने वाली पहली फसल भी जौ ही होती है। यहीं कारण है कि इसे माँ दुर्गा को चढ़ावे के रुप में अर्पित किया जाता है। इसके साथ ही ऐसा माना जाता है कि नवरात्रि आरंभ में कलश के पास माँ दुर्गा को चढ़ावे के रुप में बोये गये यह जौ के बीज आने वाले भविष्य के विषय में संकेत देते हैं। यदि यह जौ तेजी से बढ़ते है तो माना जाता है कि घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहेगी। वहीं यदि जौ मुरझाए हुए हो या इनकी वृद्धि बहुत ही धीमी हो तो यह भविष्य में होने वाली किसी अशुभ घटना का संकेत देता है। नवरात्रि के पर्व में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। माँ दुर्गा के भक्तों द्वारा अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं की विशेष पूजा की जाती है। इसके अंतर्गत 9 कुंवारी कन्याओं को घर बुलाकर पूरे आदर के साथ उन्हें भोजन कराया जाता है और भोजन के पश्चात उन्हें दक्षिणा और भेंट भी दी है। मान्यताओं के अनुसार कन्या पूजन द्वारा धन, संपदा, सुख समृद्धि आदि जैसे कई विशेष लाभ मिलते हैं। कन्या पूजन के दौरान कन्याओं को फल, मिठाई, श्रृंगार की वस्तुएं, कपड़े, मिठाई तथा हलवा, काला चना और पूरी जैसे पकवान प्रस्तुत करने की प्रथा है। नवरात्रि के नौ दिन आदि शक्ति के नौ रुपों को समर्पित हैं और इनमें से हर देवी को हमें कुछ अलग भोग अर्पित करना चाहिए। यदि देवी के नौ रुपों को बताये गये क्रम अनुसार भोग अर्पित किये जायें तो चैत्र नवरात्रि पूजन का विशेष फल प्राप्त होता है। पहला दिन- इस दिन को प्रतिपदा के नाम से जाना जाता है और यह देवी शैलपुत्री को समर्पित होता है। इस दिन हमें देवी को भोग में केला अवश्य अर्पित करना चाहिए। दूसरा दिन- इस दिन को सिंधारा दौज के नाम से जाना जाता है और यह माता ब्रम्हचारिणी को समर्पित होता है। इस दिन हमें देवी माँ के भोग में देसी घी अवश्य अर्पित करना चाहिए। तीसरा दिन- इस दिन को गौरी तेज या सौजन्य तीज के नाम से जाना जाता है और यह देवी चंद्रघंटा को समर्पित होता है। इस दिन हमें देवी माँ के भोग में नमकीन मक्खन अवश्य अर्पित करना चाहिए। चौथा दिन- इस दिन को वरद विनायक चौथ के नाम से जाना जाता है, यह दिन माता कूष्मांडा को समर्पित होता है। इस दिन हमें देवी माँ के भोग में मिश्री अवश्य अर्पित करना चाहिए। पांचवा दिन- इस दिन को लक्ष्मी पंचमी के नाम से जाना जाता है और यह दिन देवी स्कंदमाता को समर्पित होता है। इस दिन हमें देवी माँ के भोग में खीर या दूध अवश्य अर्पित करना चाहिए। छठवां दिन- इस दिन को यमुना छत या स्कंद सष्ठी के नाम से जाना जाता है, यह दिन देवी कात्यायनी को समर्पित होता है। इस दिन हमें देवी माँ को भोग स्वरुप माल पुआ अवश्य चढ़ाना चाहिए। सातवां दिन- इस दिन को महा सप्तमी के रुप में मनाया जाता है और यह दिन देवी कालरात्रि को समर्पित होता है। इस दिन हमें देवी माँ को भोग के रुप में शहद अवश्य चढ़ाना चाहिए। आठवां दिन- इस दिन को दुर्गा अष्टमी के नाम से जाना जाता है और यह दिन माता महागौरी को समर्पित होता है। इस दिन हमें देवी माँ को भोग के रुप में गुढ़ या नारियल अवश्य अर्पित करना चाहिए। नौवां दिन- इस दिन को नवमी या रामनवमी के नाम से जाना जाता है और यह दिन देवी सिद्धिदात्री को समर्पित होता है। इस दिन हमें देवी माँ को भोग के रुप में धान का हलवा अवश्य अर्पित करना चाहिए। माँ भगवती आपकी सब मनोकामना को पूर्ण करे। 🚩🚩🚩जय माता दी🚩🚩🚩