कर्ज से छुटकारा पाने का उपाय Jyotish Acharya Dr Umashankar Mishra 9415 087 711 923 5722 996 आज के समय में कर्ज एक गंभीर समस्या बन गई है, कर्ज कर्ज को समस्या व्यक्ति को अनेक प्रकार की परेशानी लाकर उसके सभी सुख-चैन छीन लेती है, कई बार व्यक्ति कर्ज के तनाव के क्रारण नशा करनें लगता है या आत्महत्या तक करनें का विचार करनें लगता है। ऋण-मोचन महा-गणपति-स्तोत्र जिसके पाठ मात्र से धन लाभ होनें लगता है और ऋण से मुक्ति हो जाती है। प्रतिदिन 21 बार या 11 बार नियमित पाठ करनें से धन प्राप्ति के मार्ग खुलते है। इस स्तोत्र को त्रिसंध्या (प्रात:, दोपहर, सायंकाल या रात्रि) में प्रतिदिन 5 बार या 11 बार जाप करने से 6 माह में ऋण (कर्ज) से मुक्ति मिल जाती है। 10,000 बार इस स्तोत्र के पाठ करने से कुछ दिनों में ऋण से मुक्त हो जाता है किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार को या किसी भी मुहुर्त में गणेश जी के सामनें दीपक अगरबत्ती जलाकर गणपति जी का पूजन करके अपने दाहिनें हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़कर पृथ्वी पर जल छोड़कर पाठ प्रारम्भ करें। विनियोग: - अस्य श्री ऋण विमोचन महा गणपति स्तोत्र मंत्रस्य शुक्राचार्य ऋषि : ऋण विमोचन महा गणपतिर्देवता अनुष्टुप छंद: ऋणविमोचन महागणपति पसनता प्रीत्यर्थे मम ऋण विमोचनार्थे (पाठे) जपे विनियोग:। ।।मूल-स्तोत्र।। ॐ स्मरामि देव-देवेश ! वक्र-तुणडं महा-बलम्। षडक्षरं कृपा-सिन्धु, नमामि ऋण-मुक्तये।। महा-गणपतिं देवं, महा-सत्त्वं महा-बलम्। महा-विघ्न-हरं सौम्यं, नमामि ऋण-मुक्तये।। एकाक्षरं एक-दन्तं, एक-ब्रह्म सनातनम्। एकमेवाद्वितीयं च, नमामि ऋण-मुक्तये।। शुक्लाम्बरं शुक्ल-वर्णं, शुक्ल-गन्धानुलेपनम्। सर्व-शुक्ल-मयं देवं, नमामि ऋण-मुक्तये।। रक्ताम्बरं रक्त-वर्णं, रक्त-गन्धानुलेपनम्। रक्त-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।। कृष्णाम्बरं कृष्ण-वर्णं, कृष्ण-गन्धानुलेपनम्। कृष्ण-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।। पीताम्बरं पीत-वर्णं, पीत-गन्धानुलेपनम्। पीत-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।। नीलाम्बरं नील-वर्णं, नील-गन्धानुलेपनम्। नील-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।। धूम्राम्बरं धूम्र-वर्णं, धूम्र-गन्धानुलेपनम्। धूम्र-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।। सर्वाम्बरं सर्व-वर्णं, सर्व-गन्धानुलेपनम्। सर्व-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।। भद्र-जातं च रुपं च, पाशांकुश-धरं शुभम्। सर्व-विघ्न-हरं देवं, नमामि ऋण-मुक्तये। ।।फल-श्रुति।। यः पठेत् ऋण-हरं-स्तोत्रं, प्रातः-काले सुधी नरः। षण्मासाभ्यन्तरे चैव, ऋणच्छेदो भविष्यति॥ 🙏🙏🌹🌹💐💐🙏🙏