सोमवार से राज पंचक, जानिए पंचक की खास बातें–: ज्योतिषाचार्य डॉ उमाशंकर मिश्र ज्योतिषाचार्य आकांक्षा श्रीवास्तव 9415087711 8840727096 astroexpertsolution.com राज पंचक : ज्योतिषाचार्य डॉ उमाशंकर मिश्र ज्योतिषाचार्य आकांक्षा श्रीवास्तव ने बताया कि सोमवार से प्रारंभ होने वाला पंचक राज पंचक कहलाता है। यह पंचक शुभ माना जाता है और मान्यता अनुसार इसके प्रभाव से पांच दिनों में कार्यों में सफलता मिलती है खासकर सरकारी कार्यों में सफलता के योग बनते हैं साथ ही संपत्ति से जुड़े काम करना भी शुभ होता है। हिन्दू पंचांग अनुसार प्रत्येक माह में पांच ऐसे दिन आते हैं जिनका अलग ही महत्व होता है जिन्हें पंचक कहा जाता है। प्रत्येक माह का पंचक अलग अलग होता है तो किसी माह में शुभ कार्य नहीं किया जाता है तो किसी माह में किया जाता है। ज्योतिषाचार्य डॉ उमाशंकर मिश्र ज्योतिषाचार्य आकांक्षा श्रीवास्तव के माध्यम से जानते हैं पंचक क्या और क्यों लगता है एवं इसका प्रभाव क्या होता है। पंचक क्या और क्यों लगता है? ज्योतिषाचार्य डॉ उमाशंकर मिश्र ज्योतिषाचार्य आकांक्षा श्रीवास्तव ने साझा किया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्र ग्रह का धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण और शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र के चारों चरणों में भ्रमण काल पंचक काल कहलाता है। इस तरह चन्द्र ग्रह का कुंभ और मीन राशि में भ्रमण पंचकों को जन्म देता है। अर्थात पंचक के अंतर्गत धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र आते हैं। इन्हीं नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को 'पंचक' कहा जाता है। पंचक के नक्षत्रों का प्रभाव जानते हैं ज्योतिषाचार्य डॉ उमाशंकर मिश्र ज्योतिषाचार्य आकांक्षा श्रीवास्तव से:- 'अग्नि-चौरभयं रोगो राजपीडा धनक्षतिः। संग्रहे तृण-काष्ठानां कृते वस्वादि-पंचके।।'-मुहूर्त-चिंतामणि अर्थात:- पंचक में तिनकों और काष्ठों के संग्रह से अग्निभय, चोरभय, रोगभय, राजभय एवं धनहानि संभव है। 1. धनिष्ठा नक्षत्र में अग्नि का भय रहता है। 2. शतभिषा नक्षत्र में कलह होने की संभावना रहती है। 3. पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में रोग बढ़ने की संभावना रहती है। 4. उतरा भाद्रपद में धन के रूप में दंड होता है। 5. रेवती नक्षत्र में धन हानि की संभावना रहती है। नहीं करते हैं ये कार्य 1.लकड़ी एकत्र करना या खरीदना 2. मकान पर छत डलवाना 3. शव जलाना 4. पलंग या चारपाई बनवाना 5. दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना। 6. अन्य कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य। 7. मान्यतानुसार किसी नक्षत्र में किसी एक के जन्म से घर आदि में पांच बच्चों का जन्म तथा किसी एक व्यक्ति की मृत्यु होने पर पांच लोगों की मृत्यु होती है। पंचक में मरने वाले व्यक्ति की शांति के लिए गरुड़ पुराण में उपाय भी सुझाए गए हैं। ज्योतिषाचार्य डॉ उमाशंकर मिश्र ज्योतिषाचार्य आकांक्षा श्रीवास्तव से जानते हैं कि सोमवार से लग रहा पंचक क्यों खास है 1.रविवार को पड़ने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है। 2.सोमवार को पड़ने वाला पंचक राज पंचक कहलाता है। 3.मंगलवार को पड़ने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है। 4.शुक्रवार को पड़ने वाला पंचक चोर पंचक कहलाता है। 5.शनिवार को पड़ने वाला पंचक मृत्यु पंचक कहलाता है। 6.इसके अलावा बुधवार और गुरुवार को पड़ने वाले पंचक में ऊपर दी गई बातों का पालन करना जरूरी नहीं माना गया है। इन दो दिनों में पड़ने वाले दिनों में पंचक के पांच कामों के अलावा किसी भी तरह के शुभ काम किए जा सकते हैं। ज्योतिषाचार्य डॉ उमाशंकर मिश्र ज्योतिषाचार्य आकांक्षा श्रीवास्तव ने साझा किया कि सोमवार से प्रारंभ होने वाला पंचक राज पंचक कहलाता है। यह पंचक शुभ माना जाता है और मान्यता अनुसार इसके प्रभाव से पांच दिनों में कार्यों में सफलता मिलती है खासकर सरकारी कार्यों में सफलता के योग बनते हैं साथ ही संपत्ति से जुड़े काम करना भी शुभ होता है ज्योतिषाचार्य डॉ उमाशंकर मिश्र ज्योतिषाचार्य आकांक्षा श्रीवास्तव 9415087711 8840727096 astroexpertsolution.com